प्रिय पाठकों
अनुस्वार के अब तक दस अंक आप सभी तक पहुँच चुके हैं। आपका अनुस्वार के साथ जुड़ना और अपना सहयोग देना हमारे लिए एक अनुपम संयोग कहा जा सकता है जिसके लिए मैं अपने पाठकों का आभारी हूँ और हमें जो सुझाव प्राप्त हुए हैं वह अनुस्वार की गुणवत्ता में निरंतर संवर्धन करने के लिये मार्गदर्शन कराते रहते हैं।
अनुस्वार का यह ग्यारहवाँ अंक अंततरू आपके समक्ष प्रस्तुत विधाओं से संबंधित सामग्री आपके सुझावों को ध्यान में रखते हुए संकलित एवं संपादित की गई है। जिसमें पठनीयता और उपादेयता का संतुलन बनाये रखने का पूरा प्रयास है।
जैसा कि आप जानते हैं अनुस्वार की श्विशिष्ट व्यक्तित्व शृंखलाश् में पूर्व में लालित्य ललित, प्रताप सहगल, संतोष श्रीवास्तव, गिरीश पंकज व इस बार प्रसिद्ध साहित्यकार विधिवेत्ता एवं विधि भारती पझिाका की संपादिका तथा लोकसभा में दशकों का अनुभव रखने वाली एक विशिष्ट व्यक्तित्व पर केंद्रित है।
सन्तोष खन्ना जी साहित्य के क्षेझा में समान रूप से योगदान देती रही हैं। उन्होंने कहानी, लघुकथा, उपन्यास, कविता आदि लगभग सभी क्षेझाों में काम किया है। उनकी लगभग 16 पुस्तकें एवं 20 संपादित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और वे अनेको सम्मानों से नवाजी जा चुकी हैं। और वे विश्व रिकार्ड होल्डर भी हैं। हमें विश्वास है कि उनकी रचनाधर्मिता आने वाले समय में भी कायम रहेगी। आशा है कि पाठकों को उनके बारे में जानकर अच्छा होगा। पिछले कुछ समय से आंतरिक एंव बाहय परिवेश में बहुत परिवर्तन आया है। कहीं.कहीं पर प्राकृतिक आपदाओं
के कारण और कहीं.कहीं पर अपने स्वयं के मूल्यों के क्षरण के आपसी के कारण सौहार्द्रता के कारण क्षरण हुआ है और भारत में जी.20 के सफल संगमन के फलस्वरूप एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख मजबूत हुई है। इसके अतिरिक्त वैश्विक स्तर पर भारत के उत्पादों की माँग में भी वृद्धि हुई है। यह बदलती हुई स्थिति हमारे देश के परिवेश में सुधार स्पष्ट करती है। इन सबको देखते हुये हम उज्ज्वल भविष्य की कल्पना कर सकते हैं।
अनुस्वार के कलेवर में हम आपके समक्ष अच्छे से अच्छे लेख, कथाएँ, संस्मरण, समीक्षाएँ, कविताएँ, व्यंग्य आदि प्रस्तुत करते रहे हैं। इस अंक में भी आपके समक्ष चुनिंदा सामग्री प्रस्तुत कर रहे हैं ष्जिसमें ममता कालिया, हरिप्रकाश राठी, नीरजा माधव, शकुंतला कालरा, सन्तोष खन्ना और सौम्या पांडे की कथाएँ हैं। लघुकथाओं में कमलेश भारतीय, बलराम अग्रवाल, की रचनाएँ हैं। काव्य संसार में हरिहर झा, सुनील गज्जाणी, धर्मपाल महेन्द्र जैन एवं सन्तोष खन्ना की कविताएँ प्रस्तुत की गई हैं।
ये अंक व्यंग्य रचनाओं से भी खाली नहीं हैं। इसमें लालित्य ललित, रवि शर्मा ष्मधुपष् और सन्तोष खन्ना के व्यंग्य भी हैं और गिरीश पंकज का व्यंग्य पर वृहद आलेख भी है। इन सबके साथ सभी स्थायी स्तंभ यथानुरूप शामिल किये गये हैं। हमें सूचित करते हुये हर्ष है कि हमारे पाठकों से निरंतर संदेश प्राप्त होते रहे हैं कि अनुस्वार का सदस्य बना लिया जाये। इस अंक के साथ सदस्यता का फार्म संलग्न है। सदस्यता फार्म की एक प्रति, वार्षिक, द्विवार्षिक या आजीवन सदस्यता शुल्क के भुगतान के रूप ें ग्रहण की जा सकती है।
आपका जुड़ना हमें बता देगा। आपका अनुस्वार परिवार में स्वागत रहेगा।
हम यह भी सूचित करना चाहते हैं कि इंडिया नेटबुक्स ने कई विधागत शृंखलाएँ आपके समक्ष प्रस्तुत की हैं जिनमें 251 व्यंग्यकारों की व्यंग्य संकलन, ष्कवि के मन सेष् काव्य शृंखला, ष्कथामालाष् के नाम से कहानी.कथा शृंखला और लघुकथासागर के नाम से लघुकथा शृंखला एंव बाल साहित्य के लिए बाल संगमन धारा अपने शीर्ष पर पहुँच रही है। इन शृंखलाओं में न केवल वरिष्ठ रचनाकारों को शामिल किया गया है अपितु नवोदित रचनाकारों को भी गुणवत्ता के आधार पर अवसर दिया जा रहा है। यदि हमारे पाठकों में से कोई इन शृंखलाआें में भाग लेना चाहता है तो उसका स्वागत है। रचनाओं की गुणवत्ता के आधार पर संबंधित शृंखला संयोजक रचनाओं के चयन एवं संपादन का कार्यभार स्वतंझा रूप से कर रहे हैं।
श्हिंदी व्यंग्य शास्झाश् योजना के संबंध में अपेक्षित कदम उठाये जा रहे हैं और अब तक भारी संख्या में आलेख प्राप्त किये जा चुके हैं। ज्ञातव्य है कि इसमें व्यंग्य के विभिन्न पक्षों से संबद्ध आलेख होंगे। यदि आप व्यंग्य के किसी पक्ष पर अपना आलेख प्रस्तुत करना चाहते हैं तो 31 अक्तूबर 2023 से पहले पदइंनजीवते/हउंपसण्बवउ पर यथाशीघ्र भेज सकते हैं।
आपको ज्ञात होगा कि पिछले वर्ष लिखित एवं वीडियो साक्षात्कारों का एक लंबा सिलसिला चला था और कुल मिलाकर लगभग 300 साक्षात्कार रिकार्ड एवं संपादित किये गये थे। इनमें से 51.51 साक्षात्कार ष्ष्इंदम न ममष्ष् एवं ष्ष्यथावतष्ष् में संग्रहीत किये गये हैं और शेष वीडियो साक्षात्कार यू.ट्यूब पर ष्ष्इंडिया नेटबुक्सष्ष् और ष्ष्अनुस्वार मंचष्ष् चैनलों में संग्रहीत किये जा चुके हैं। आपसे अनुरोध है कि यू.टयूब पर इन साक्षात्कारों को देखकर अपने सुझाव संप्रेषित करें। अंत में यह स्पट कर देना चाहता हूँ कि द्वितीय चरण में नवोदित एवं युवा रचनाकारों के साथ भी सरल साक्षात्कार प्रारंभ कर दिये गये हैं। अतरू साक्षात्कार के संबंध में अपनी स्वेच्छा का संदेश हमें व्हाट्सअप पर प्रेषित कर सकते हैं। इंडिया नेटबुक्स ने बाल रचनाकारों को प्रेरणा देने के लिए एक योजना तैयार की है जिसमें विद्यालयों एवं महाविद्यालयोें के स्तर पर प्रतिभावान विद्याार्थियों की रचना क्षमता में विकास के लिये प्रयास किये जाते हैं और उनकी चुनिंदा रचनाओं को संकलित करके पुस्तकाकार दिया गया है। विद्यालय एवं महाविद्यालय से जुड़े हुये हमारे पाठकों को अनुस्वार मंच एवं इंडिया नेटबुक्स के द्वारा इस योजना के लिये आमंझित किया जाता है और इस सबंध में किसी भी जानकारी के लिये आप हमें संपर्क कर सकते हैं।
अनुस्वार समूह के अन्य क्रिया.कलापों एवं साहित्यिक गतिविधियों में निरंतर परिवर्धन हो रहा है। इस अवधि में आपके मुख्य संपादक को ष्ष्अंतर्राष्ट्रीय वैश्विक मंचष्ष् द्वारा ष्ष्जयशंकर प्रसाद स्मृति पुरस्कारष्ष् से विभूषित किया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें अनेकानेक कार्यक्रमों में शामिल होने का मौका मिला है।
इस अंक के अतिथि संपादक श्री प्रेम जनमेजय को उनके सफल मार्गदर्शन हेतु धन्यवाद देता हूँ और आभार व्यक्त करता हूँ।
अंततरू अनुस्वार का यह अंक पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है। के सुझाव एवं मार्गदर्शन की हमेशा प्रतीक्षा रहती है।

