बड़े भैया गिरीश पंकज पर केन्द्रित अनुस्वार का अंक (अप्रैल.जून, 2023) देखने का सौभाग्य मिला। भैया के लेखन से मो शुरू से परिचित हूँ। उनका बहुआयामी लेखन हर किसी को प्रभावित करता है। ईशान की सामग्री पढ़कर मुझे भी कुछ नई बात जानने का अवसर मिला। संजीव कुमार से उनकी जो लंबी बातचीत हुई, वह किसी दस्तावेज़ से कम नहीं है। आलोक सक्सेना द्वारा लिया गया साक्षात्कार भी ज्ञानवर्धक है। अन्य सामग्री भी गिरीश भैया के व्यक्तित्व को समझने के लिए पर्याप्त है। अनुस्वार के इस उपक्रम की कितनी तारीफ की जाए, कम है।
सतीश उपाध्याय, मनेन्द्रगढ़ (छत्तीसगढ़)
अनुस्वार का अप्रैल जून 2023 का अंक पढ़ने को मिला। विशिष्ट व्यक्तित्व व्यंग्यश्री गिरीश पंकज पर एकाग्र इस साहित्यिक पझिाका के अभिनव अनुष्ठान को देखकर आत्मिक खुशी हुई। आपने मेरा लेख भी प्रकाशित किया है, इस हेतु आपका आभार। आलोक सक्सेना ने गिरीश पंकज के साथ जो बातचीत की है, वह पठनीय है। भाषा और संस्कृति एक दूसरे के पूरक हो, यह बात विचारणीय है। शख्सियत जिनका कहना है मैडॉक्टर संजीव कुमार की लंबी बातचीत भी प्रभावित करती है। गिरीश पंकज साहित्य और पझाकारिता की दुनिया के एक अनोखे हस्ताक्षर हो। इन पर आपने जो विशिष्ट सामग्री प्रकाशित की है, इससे उनके बारे में साहित्य जगत के अन्य लेखन पाठकों को विस्तार के साथ पता चलेगा। अनुस्वार का हर अंक अपने किस्म का अनूठा अंक होता है। इसका कलेवर, इसकी सामग्री इसे देश की महत्वपूर्ण साहित्यिक पझिाका के रूप में स्थापित कर रही है।
रविन्द्र गिन्नौरे, भाटापारा
गिरीश पंकज पर केद्रित अनुस्वार का अंक पढ़कर लगा कि एक सक्रिय लेखक के साथ किसी पत्रिका ने न्याय किया। इतना कुछ लिखे जाने के बावजूद भैया को जिस तरह का महत्व मिलना चाहिए था, वह नही मिल सका। मगर अनुस्वार ने इसकी कमी पूरी कर दी। आपका धन्यवाद। जितनी भी सामग्री इसम प्रकाशित हुई है, उसे मैंने ध्यान से पढ़ा। अनुस्वार के इस कार्य की जितनी भी प्रशंसा करूं, कम है।
अर्चना शर्मा, सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल)
विशिष्ट व्यक्तित्व व्यंग्यश्री गिरीश पंकज पर एकाग्र अनुस्वार का अंक संग्रहणीय बन गया है। आपको बधाई। इस अंक में प्रकाशित अनेक लेख सृजनधर्मी रचनाकार को समझने म सहायक साबित होंगे। जब गिरीश पंकज पचास वर्ष के हुए थे, तब मोने भी साहित्य वैभव पझिाका का एक अंक ष्पचास के गिरीशष् प्रकाशित किया था। पन्द्रह साल बाद फिर एक महत्वपूर्ण अंक अनुस्वार के रूप में सामने आया है। डॉ. संजीव कुमार से लेकर प्रेम जनमेजय तक की कलम से गिरीश जी के बारे में सद्भावना के साथ जो कुछ लिखा गया है, वह उनके कृतित्व का दर्पण ही कहा जाएगा।
डॉ. सुधीर शर्मा, रायपुर
अनुस्वार का अप्रैल.जून 2023 अंक देखकर मुझे आत्मिक खुशी हुई। यह मेरा परम् सौभाग्य है कि अनुस्वार जैसी चर्चित हो चुकी साहित्यिक पझिाका ने मुझ पर सामग्री प्रकाशित की। आज के समय में ऐसी उदारता दुर्लभ हो चुकी है। डॉक्टर संजीव कुमार, आप तीव्रगति के साथ लिखने वाले रचनाकार तो हो ही, लेकिन उससे भी पहले आप बेहतर मनुष्य हो। आपका नीरक्षीर विवेचन मुझे हर वक्त प्रभावित करता रहा है। आपके साथ हुई लंबी बातचीत ने मुझे बड़ा सुकून दिया। इसके अलावा, डॉक्टर चितरंजन कर, रविंद्र गिन्नौरे, संजय द्विवेदी, अख्तर अली, द्वारका प्रसाद अग्रवाल, रमेश तिवारी रिपु, दिलीप तेतरवे और आलोक सक्सेना ने मेरे लिए जो कुछ भी लिखा, इसके लिए सब का आभार ज्ञापन करता हूँ और बड़े भाई प्रेम जनमेजय जी ने भी ष्अंततरूष् में मुझ पर कलम चलाई। आवरण पृष्ठ पर अपनी बहुरंगी छवि को देखकर मो खुद पर मोहित हो गया। मो शुभ्रामणि का विशेष आभार ज्ञापन करता हूँ।
गिरीश पंकज, रायपुर
ष्अनुस्वारष् पत्रिका का अप्रैल.जून 2023 अंक देखकर प्रसन्नता हुई क्योंकि उसम अपने प्रिय लेखक गिरीश पंकज के विशिष्ट व्यक्तित्व को जानने समझने का अवसर मिला। पझिाका का आवरण ही बेहद आकर्षक है। फेसबुक के माध्यम से पंकज जी की सक्रियता मैं देखती रही हूँ, लेकिन आज तक उनसे मिलने का अवसर नही° आया। लेकिन ष्अनुस्वारष् का अंक पढ़कर लगा, उनसे भेट हो गई। मुझे उनके कृतित्व के बारे में विस्तार से जानने को मिला। मैंने भी पंकज जी की कुछ किताबों पर समीक्षात्मक लेख भेजा था, जो किसी कारणवश नहीं° छप पायी, इसका मुझे दुख है। अंत में प्रेम जनमेजय जी ने भी गिरीश पंकज के बारे में लघु मगर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। इस अंक में केद्रित व्यक्तित्व की रचनाएँ भी प्रभावित करती हो। अनुस्वार की अन्य सामग्री भी अनुस्वार के कलेवर को समृद्ध करती है। बहुत.बहुत शुभकामनाएँ।
डॉ. योगिता जोशी, जयपुर
